How to conduct effective meetings

परिणाम पूर्ण बैठक कैसे करें

पिछले साप्ताह मैं एक बैठक में था, जिसमें काम समय पर पूरा हुआ. महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये. यही नहीं, सबको पता था, की किसको क्या करना है, और कब तक. सच में, यह समय का सदुपयोग था.

दुर्भाग्य से, कई बैठकें ऐसी नहीं हो पातीं.

चलिए देखतें है, कि कुछ सरल नियमों का पालन कर के, कैसे बैठकों को अधिक प्रभावपूर्ण बनाया जा सकता है.

पहला नियम - उद्देश्य और वांछित परिणामों की स्पष्टता.

जैसा ज़िंदगी में होता है, वैसा बैठकों में भी. यदि कुछ करने का इरादा हो तो उद्देश्य की स्पष्टता आवश्यक है.

यही नहीं - हमें कोई भी बाहर से आ कर नहीं बताता है, की भाई - अपने परिप्रेक्ष्य से यह यह वांछित परिणाम रख लो.

खुद ही सोचना पड़ता है कि इस विषय में सोचना आवश्यक है भी कि नहीं.

यदि हम उद्देश्य का चिंतन किसी भी बैठक से पहले करेंगे सो बैठक तो अधिक उपयोगी होगी ही, साथ में जीवन की सफलता का हमें एक सूत्र मिल जाएगा.

दूसरा नियम - उपयुक्त भागी निश्चित करें.

वांछित परिणामों के आधार पर, यह पहले ही सोचना आवश्यक है, की किस किस का बैठक में भाग लेना उचित है, और आवश्यक भी.

जिन की सच में आवश्यकता नहीं है, उन्हें व्यर्थ ही आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए.

दूसरी तरफ, जिन की भागीदारी परिणाम के लिए महत्वपूर्ण है, उनकी उपस्तिथि सुनिस्चित की जानी चाहिए. यदि आवश्यक हो, तो पीछे पड कर भी.

तीसरा नियम - कार्य सूची का उपयोग.

बैठक में चर्चा के प्रस्तावित विषयों की सूची सबको तैयारी का मौका देती है.

बैठक के दौरान, कार्यसूची यह भी स्पष्ट करती है, कि विषय अनुसार समय का सदुपयोग हो रहा है, कि नहीं.

यह आवश्यक नहीं, कि पूर्व निर्धारित सूची को पत्थर पर लकीर समझा जाए. इसे बदला भी जा सकता है. पर यह आवश्यक है, की जब बैठक के प्रस्तावित कार्य में फेर बदल हो - चाहे बैठक के दौरान ही - तो कार्यसूची इसे उसी समय दर्शाए.

इस काम के लिए ब्लैक बोर्ड उपयोगी सिद्ध होता है.

सबसे बेहतर तो यह होगा कि बैठक से एक दो दिन पहले ही, प्रस्तावित कार्यसूची सबको भेज दी जाए और यदि उपयुक्त हो तो सबसे पूछ भी लिया जाए, कि इस सूची में, कुछ फेरबदल तो नहीं चाहिए!

चौथा नियम - समय की पाबंदी

बैठक की शुरुआत - और समाप्ति - यदि निर्धारित समय पर न हो तो ह्म अनजाने में पाबंद आने वालों को दंडित करतें हैं. सब शीघ्र ही समझ जाते हैं की समयानुसार आने पर, व्यर्थ समय गवाँ कर, लेट लतीफों का इंतज़ार करना पड़ता है.

परिणाम स्वरूप फ़िर, 'पहले आप, पहले आप' का खेल शुरू हो जाता है, और हमेशा की तरह - ऐसा होने पर - गाड़ी निकल जाती है.

पाँचवाँ नियम - संक्षिप्त विवरण, लिखित लें

काम आसान रखने की दृष्टि से भी - बैठक के संक्षिप्त विवरण में दो चीज़ें आवश्यक हैं. किए गये फ़ैसले और लिए गये 'ऐक्शन आइटम'. याद रखें, इन दो से भी काम चल सकता है, पर पाबंदी और स्पष्टता आवश्यक हैं.

इन्हें संबंधित हो चुकी और और होनें वाली बैठकों के सन्दर्भ में देखा जाना चाहिए. संक्षिप्त विवरणों की श्रंखला बैठकों को एक  लड़ी में पिरोती है, जिस से सांझे कामों को आगे बढ़ाने में बहुत मदत मिलती है.

ऐसा ना करने से, हर बैठक में, नये सिरे से शुरुआत व्यर्थ पूर्ण हो सकती है.

बैठक के जल्द बाद ही, संक्षिप्त विवरण, प्रतिभागियों में वितरित करना चाहिए. इस से वे समय रहते, प्रमुख मुद्दों की समीक्षा कर सकते हैं और यह भी निर्धारित कर सकते हैं, की उन्हें अगला क्या कदम उठना है.

छटा नियम - अगली बैठक का निर्धारण

छटा और अंतिम नियम है - अगली बैठक की तारीख का निर्धारण.

बैठक के दौरान, सबके साथ साथ रहते ही, यदि यह निर्धारित कर लिया जाए कि अगली बैठक कब है और कहाँ, तो बाद का मुश्किल काम आसान हो जाता है.

अंत में

इन छह नियमों के पालन से, आपकी बैठकें अवश्य ही अधिक परिणाम पूर्ण हो जाएँगी. यह नियम हैं -

पहला - उद्देश्य और वांछित परिणामों की स्पष्टता
दूसरा - उपयुक्त भागी निश्चित करें
तीसरा - कार्यसूची का उपयोग
चौथा - समय की पाबंदी
पाँचवाँ - संक्षिप्त विवरण, लिखित लें
और छटा - अगली बैठक तभी निर्धारित करें.
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धन्यवाद.

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